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जनता रह गई भौचक.. जब न्यायधीश ही मांगने लगे न्याय..

जनता रह गई भौचक.. जब न्यायधीश ही मांगने लगे न्याय..

*विश्व उपभोग्ता दिवस में सब रहे सन्न जब न्यायधीश बोले.. अब बताओ जाएं तो जाएं कहां..?*
 ।।चर्चित समाचार एजेंसी।।
 ।।शिवपुरी 21/03/25।। 
 क्या हुआ :- विश्व उपभोग्ता दिवस..। 
कहां हुआ:- जिला पंचायत सभागार शिवपुरी..।
कौन-कौन रहे मौजूद:- उपभोगता फोरम के न्यायाधीश सदस्य, जिला प्रशासन, आम जनता, ग्राहक पंचायत संघठन..
मामला:- आम जनता को उपभोगता के कर्तव्यों को बताना एवम उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना.
हाईलाइट:- कार्यक्रम के समापन से ठीक पहले अमजनता में से किसी ने मिलावटी पैट्रोल से टू व्हीलर खराब होने की बात छेड़ दी फिर क्या..!! वहां पर क्या खास और क्या आम..?  सभी ने एक ही भाषा बोली.. कि हम भी हैं इस समस्या से परेशान.. पूरे एपिसोड में मज़ा तब आया जब फोरम के सदस्य जो दूसरों को न्याय दिलाते हैं वो खुद कहने लगे कि हम भी परेशान बताओ कहां जाएं..??
दरअसल हर वर्ष 21 मार्च को शासकीय उपभोग्ता दिवस मनाया जाता है जिसमें शासन द्वारा आमजनता को एक उपभोग्ता के रूप में उनके कर्तव्यों और अधिकारों के बारे में बताया जाता है चूंकि न विभाग इस तरह के कार्यों में कोई खास रुचि रखता है और न ही आम जनता इस तरह के कार्यक्रम की घिसी पिटी बातों में रुचि रखती है, क्योंकि जनता अब जागरूक हो चुकी है। वह जानती है कि यहां नया कुछ नहीं होने वाला है, हां ऐसे कार्यक्रमों में न जाकर हमारा घंटा दो घंटा खराब होने से बचाया जा सकता है।
इसी क्रम में इस साल भी 21 मार्च को जिला पंचायत के सामाजिक न्याय विभाग के सभागार में कार्यक्रम रखा गया। वही पुराने लोगों के मुंह में फंसे पुराने से टेप रिकॉर्डर ने पुराने गाने वाली पुरानी कैसिट फंसाकर राग अलापना चालू कर दिया कि, उपभोगता को किसी भी दुकान से माल खरीदते समय एक्सपायरी का ध्यान रखना चाहिए, पक्का बिल लेना चाहिए, पैकेट पर लिखे कंटेंड को देखकर वस्तु खरीदना चाहिए, खुदरा मूल्य अंकित देखकर ही गुड्स खरीदना चाहिए, मैन्यू फैक्चर का पता एवम टोल फ्री नंबर अंकित वाले पदार्थ या वस्तु ही खरीदना चाहिए, गैस सिलेंडर लेते समय उस पर अंकित वजन को देखकर तौल कांटे से तौल कराकर ही लेना चाहिए, इसे ऐसे लेना चाहिए उसे वैसे लेना चाहिए। वहीं उपभोगता फोरम के न्यायाधीश सदस्य ने भी अपनी बात कह डाली कि इन सबके बाद भी आप ठगे जाते हो तो उपभोगता फोरम में आइए न्याय पाना भी आपका अधिकार है इसे हम दिलाएंगे..।
 *जैसे ही पैट्रोल की बात आई  आमजन ने लपक के ले ली क्लास..*
यहां तक तो ठीक था पर जैसे ही नापतौल अधिकारी श्री चतुर्वेदी ने पैट्रोल को हमेशा मीटर सेट कराकर लेने की बात कही, आमजनता टाइप के कुछ लोगों ने लपक के मुद्दा पकड़ लिया और पूछ लिया कि इस कार्यक्रम में पैट्रोल पंप संचालक कहां हैं..? इस पर खाद्य अधिकारी श्री कदम ने कहा कि आज के इस कार्यक्रम में कोई भी पैट्रोल पंप संचालक नहीं आए हैं फिर क्या था सभी मिलावटी पैट्रोल के खिलाफ़ एक स्वर हो गए और कहने लगे कि इन पर कोई अंकुश क्यों नहीं लगाया जाता है..? यह उसी रेट में घटिया पैट्रोल हमको बेच रहे हैं जिससे हमारी गाडियां खराब हो रही हैं।
खाद्य अधिकारी गौरव कदम यह सब सुनकर खामोश खड़े रहे।
 *मंच संचालक माइक छोड़कर ख़ुद ही बन गए फरियादी..* 
मामला कुछ ऐसा संवेदनशील था कि शासकीय रूप से मंच संचालन करने आए गिरीश मिश्रा भी कपड़े फाड़ने से बाज नहीं आए, कहने लगे कि मेरी दो बार गाड़ी खराब हुई जिसे सुधरवाने में 1000 रूपए लग गए कौन देगा मुझे मेरे पैसे..? वहीं नापतौल अधिकारी भी इसी पीड़ा से ग्रसित दिखे बोले मेरे हाथ में नापतौल चैक करना है पैट्रोल चैक करना नहीं...। नहीं तो ठोक देता चालान.. वहीं आर टी आई एक्टिविस्ट हरवीर सिंह चौहान बोले मै इनको दिन में तारे दिखाऊंगा घर जाकर सबसे पहले एक आर टी आई लगाऊंगा, कि खाद्य अधिकारी ने अब तक कितनी बार पैट्रोल पंपों की जांच की, इस बार भी खाद्य अधिकारी  गौरव कदम चुप ही बने रहे।सभी लोग कुछ इसी तरह अपनी पीड़ा सुनाते दिखे।
 *फोरम के सदस्य भी दिखे पीड़ित, बोले हम कहां जाएं..?* 
इस पूरे कार्यक्रम में सबसे मज़ेदार जो बात थी वह यह थी कि कुछ देर पहले जो सदस्य सबको न्याय दिलाने की बात कह रहे थे उनकी गाड़ियां भी खराब हुईं थीं और वो भी अपनी गाडियां सुधरवाने में पैसा लगा चुके हैं। उपभोगता फोरम की सदस्य अंजू गुप्ता और रामकृष्ण शर्मा ने खुद यह बात स्वीकारी कि मार्केट में जो नया वाला पैट्रोल आया है उसमे इथेनॉल ज्यादा मात्रा में है, जिससे उसका रंग भी गहरा लाल हो चुका है इसी से टू व्हीलर गाडियां खराब हो रही हैं। पर समझ में नहीं आ रहा ओ कि इसकी शिकायत करें तो कहां करें..?
इस बात पर ग्राहक पंचायत के सदस्य अखिलेश शर्मा ने कहा कि  मामला हम उठाते हैं आपके फोरम में भी पंहुचा देंगे बस न्याय आपको दिलाना है।
 *लेखक:-वीरेन्द्र "चर्चित"*

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